नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा की पूरी जानकारी : जरूर जानें ये फायदे और नुकसान

नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा – टाइटल को देख कर आप समझ ही गये होंगे कि आज हम थोड़ा हटकर मीडीसिन की बात करने वाले हैं हालाँकि इसका उपयोग शारीरिक रोग के लिए लम्बे से किया जाता रहा है लेकिन बहुत कम लोगों को इसके बारे में पता है।

अब जैसे जैसे इंटरनेट की पहुंच बढ़ी है, लोगों को उपयुक्त जानकारी घर बैठे ही प्राप्त हो जा रही है और हमारे ब्लॉग का काम भी आपको हेल्थ से जुडी जानकारियों से रूबरू कराना है। आज के आर्टिकल में हम बात करने वाले हैं नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा पतंजलि (Neela thotha ayurvedic dawa) के बारे में।

आप में से बहुत सारे लोग सोच रहे होंगे नीला थोथा कौन सी दवा है? इसके लिए आपको थोड़ा सब्र रखकर यह आर्टिकल पढ़ना होगा जिसमे आप नीला थोथा के फायदे और नुकसान भी जानेंगे। यकीन मानिये, यह दवा आपकी रोजाना की छोटी मोटी बिमारियों के लिए रामबाण का काम करेंगी।

नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा

नोट – नीला थोथा पाउडर, क्रिस्टल, और सलूशन के रूप में उपलब्ध होता है और बहुत जहरीला पदार्थ है। इसका सामान्य तौर पर उपयोग औद्योगिक अनुप्रयोगों और कृषि में उपयोग किए जाते हैं, साथ ही यह एंटीबायोटिक दवाओं के लिए भी उपयोगी है। लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के सेवन करना बहुत घातक हो सकता है।

नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा क्या होती है ?

नीला थोथा की आयुर्वेदिक दवा “तुतिया” होती है। तुतिया एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं। विज्ञान की भाषा में कहें तो नीला थोथा या तूतिया एक अकार्बनिक यौगिक है जिसका रासायनिक सूत्र CuSO4 है।

नीला थोथा की आयुर्वेदिक दवा “तुतिया” होती है। तुतिया एक आयुर्वेदिक औषधि है जिसका उपयोग विभिन्न प्रकार के रोगों के इलाज के लिए किया जाता है। इसमें एंटीसेप्टिक, एंटीफंगल, एंटीमाइक्रोबियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं।

तुतिया का उपयोग निम्नलिखित बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है:

  • त्वचा रोग जैसे दाद, खुजली, सोरायसिस, एक्जिमा
  • कान के संक्रमण
  • नाक के संक्रमण
  • मुंह के छाले
  • आंख के संक्रमण
  • मूत्राशय के संक्रमण
  • यौन संचारित रोग
  • गले में खराश और दर्द को कम करने के लिए
  • घावों और संक्रमणों के इलाज के लिए

ध्यान रखें, नीला थोथा हर कोई व्यक्ति सेवन नहीं कर सकता है। यह एक जहरीला पदार्थ है, और इसके सेवन से गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं जैसे पेट दर्द, उलटी दस्त, सिर दर्द, बुखार, इत्यादि। इसलिए हमेशा डॉक्टर्स की उचित सलाह पर ही दवा का सेवन करें।

नीला थोथा दवा का सेवन कैसे किया जाता है ?

पाउडर, क्रिस्टल, और सलूशन के रूप में उपलब्ध होता है जो सामान्य रूप से कृषि संबंधी दवाओं में उपयोगी माना जाता है लेकिन अब नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा के रूप में भी उपलब्ध है जिन्हे बहुत सावधानी से लैब में बनाया जाता है। नीला थोथा का प्रयोग दवाइयों के लिए विभिन्न तरीकों से किया जाता है। यह एक एंटीबायोटिक, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक के रूप में कार्य कर सकता है।

नीला थोथा का प्रयोग दवाइयों के रूप में निम्नलिखित तरीकों से किया जा सकता है:

मौखिक रूप से: नीला थोथा को टैबलेट, कैप्सूल या तरल के रूप में मुंह से लिया जा सकता है।
बाह्य रूप से: नीला थोथा को पाउडर, क्रीम, लोशन या समाधान के रूप में त्वचा पर लगाया जा सकता है।
आंतरिक रूप से: नीला थोथा को आंखों, कान या नाक में डाला जा सकता है।

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मुँह के छालों के लिए नीला थोथा के फायदे – Neela thotha Ke Fayde

मुँह के छाले एक आम समस्या है जो अक्सर बैक्टीरिया या वायरस के कारण होती है। ये छाले मुंह के अंदर कहीं भी हो सकते हैं, लेकिन आमतौर पर जीभ, गाल या होंठों के अंदर पाए जाते हैं। मुँह के छाले दर्दनाक हो सकते हैं और खाने, पीने और बोलने में कठिनाई पैदा कर सकते हैं।

नीला थोथा, जिसे कॉपर सल्फेट के रूप में भी जाना जाता है, एक एंटीबायोटिक, एंटीफंगल और एंटीसेप्टिक है। यह कुछ प्रकार के बैक्टीरिया और कवक के खिलाफ प्रभावी है। नीला थोथा का उपयोग मुँह के छालों के इलाज के लिए एक घरेलू उपाय के रूप में किया जा सकता है।

सामान्य रूप से नीला थोथा के फायदे निम्नलिखित हैं –

  • फंगल संक्रमण
  • त्वचा की चोटें
  • कान का संक्रमण
  • गले का संक्रमण
  • आंखों का संक्रमण
  • त्वचा की सूजन
  • मुँह के छाले

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नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा पतंजलि

पतंजलि की नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा पतंजलि त्रिफला क्वाथ है। यह एक आयुर्वेदिक काढ़ा है जिसमें नीला थोथा, आंवला, बहेड़ा और हरड़ शामिल हैं। यह काढ़ा कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभों के लिए उपयोग किया जाता है, जिसमें पाचन में सुधार, कब्ज को रोकना, और मूत्र पथ के संक्रमण को रोकना शामिल है।

इस काढ़े में शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटियां जैसे नीला थोथा (20 ग्राम), आंवला (20 ग्राम), बहेड़ा (20 ग्राम), हरड़ (20 ग्राम), इत्यादि पाया जाता है। सेवन करने के लिए इन सामग्रियों को एक साथ मिलाकर एक गिलास पानी में उबाला जाता है। जब पानी आधा रह जाए, तो इसे छानकर पी लिया जाता है।

हम आपको फिर एक बार याद दिला दें कि नीला थोथा एक आयुर्वेदिक के साथ ही रासायनिक पदार्थ (कॉपर सल्फेट) है जिनसे खतरनाक दवाइयां बनायीं जाती हैं इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने की कोशिश न करें अन्यथा फायदे के स्थान पर नुकसान झेलने पड़ सकते हैं।

नीला थोथा के उपयोग से जुडी सावधानियां

नीला थोथा आयुर्वेदिक दवा निश्चित रूप से काफी सारी शारीरिक समस्याओं जैसे मुँह के छले तथा सूजन को दूर करने में सहायक है लेकिन इसके उपयोग के समय सावधानी बरतना भी बेहद जरुरी है। जब आप इसका उपयोग कर रहे हों या ना भी कर रहे हो तो निम्नलिखित सावधानी बरतनी चाहिए –

  • नीला थोथा को सीधे मुंह में न डालें। यह जहरीला है और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
  • नीला थोथा को त्वचा पर लगाने से पहले एक छोटे से क्षेत्र पर परीक्षण करना महत्वपूर्ण है। यदि आपको कोई प्रतिक्रिया होती है, तो इसका उपयोग तुरंत बंद कर दें।
  • यदि आप नीला थोथा खा लेते हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
  • नीला थोथा बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें।

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