पुत्र होने वाले तिल : इस स्थान पर तिल है लड़का होने की गारंटी ! क्या कहते हैं शास्त्र और विज्ञान

पुत्र होने वाले तिल

आज भले ही लड़का लड़की के समान होने की कवायद की जाती है लेकिन अभी भी अधिकतर दंपती पुत्र की चाह रखते हैं और इसके पीछे उनके अपने कारण हैं। इसके लिए लोग तरह तरह के टोटके भी अपनाते हैं और अनेक तरह के संकेतों के जरिए समझते हैं कि उन्हें पुत्र प्राप्ति होगी या नहीं।

ऐसा ही एक बहु प्रचलित शारीरिक संकेत हैं पुत्र होने वाले तिल (Putra hone wale til) जिन्हे समझकर संतान के लिंग की गणना की जाती है। यह सिर्फ एक तुक्का या अंधविश्वास नहीं है बल्कि जानकारों की काफी सालों की मेहनत और रिसर्च का परिणाम है जिनके तथ्य हम आज आपके सामने प्रस्तुत करने वाले हैं।

इस आर्टिकल के माध्यम से आप जानेंगे कि पुत्र प्राप्ति के योग कैसे बनते हैं? ये तो आप जानते ही हैं कि मनुष्य में जन्म के साथ ही अनेक प्रकार के तिल भी होते हैं जिनकी जानकारी बहुत कम लोगों को होती लेकिन ये तिल आपके जीवन पर कहीं न कहीं प्रभाव डालते हैं या आपके भविष्य की गणना करते हैं।

पुत्र होने वाले तिल कौन से होते हैं ? Putra hone wale til

व्यक्ति के भविष्य, स्वभाव, और व्यक्तित्व का अनुमान लगाने वाला शास्त्र समुद्र शास्त्र के अनुसार छाती, पेट, तर्जनी अंगुली, नाभि, जांघ आदि पर तिल होना पुत्र प्राप्ति के संकेत देते हैं। इसके अलावा, तिल के आकार, रंग और स्थिति के आधार पर भी उसके अर्थ में अंतर हो सकता है।

बताते चले कि समुद्र शास्त्र व्यक्ति के शरीर की बनावट, चेहरे की विशेषताएं, हाथों की रेखाएं, और अन्य शारीरिक विशेषताएं उसके भविष्य के बारे में महत्वपूर्ण संकेत देती हैं। समुद्र शास्त्र के अनुसार, एक व्यक्ति की शारीरिक विशेषताओं में निहित जानकारी का उपयोग उसके स्वास्थ्य, धन, सफलता, और अन्य पहलुओं को समझने के लिए किया जा सकता है।

शरीर के इन स्थानों पर तिल होने से मिलते हैं पुत्र प्राप्ति के संकेत

हमारे पूर्वजों और शास्त्रों द्वारा ऐसी काफी सारी विधाएँ बताई हैं जो लड़का होने का संकेत देते हैं और उनमे से तिल की स्थितियों के बारे में आगे बताया गया है –

  • छाती पर तिल: छाती पर तिल होना पुत्र प्राप्ति का शुभ संकेत माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर तिल होने वाली महिला को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है।
  • कान पर तिल: कान पर तिल होना भी पुत्र प्राप्ति का शुभ संकेत माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर तिल होने वाली महिला को सुंदर और गुणवान पुत्र की प्राप्ति होती है।
  • नाभि के पास तिल: नाभि के पास तिल होना भी पुत्र प्राप्ति का शुभ संकेत माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर तिल होने वाली महिला को धनवान पुत्र की प्राप्ति होती है।
  • दाहिने गाल पर तिल: दाहिने गाल पर तिल होना भी पुत्र प्राप्ति का शुभ संकेत माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर तिल होने वाली महिला को तेजस्वी और बुद्धिमान पुत्र की प्राप्ति होती है।
  • बाएं हाथ के अनामिका उंगली पर तिल: बाएं हाथ के अनामिका उंगली पर तिल होना भी पुत्र प्राप्ति का शुभ संकेत माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस स्थान पर तिल होने वाली महिला को कर्मठ और सफल पुत्र की प्राप्ति होती है।

इस संबंध में एक और खास बात ध्यान रखने वाली यह है कि एक गोल और काले रंग का तिल को अधिक शुभ माना जाता है, जबकि एक अनियमित आकार का और लाल या भूरे रंग का तिल अशुभ माना जाता है।

नोट – हमारी वेबसाइट HealthyDawa.Com किसी भी प्रकार के अन्धविश्वास और बेतुकी बातों, बिना वैज्ञानिकी प्रमाण के तथ्यों का समर्थन नहीं करती है। यहाँ बताए गए तथ्य समुद्र शास्त्र से लिए गए हैं जिसे एक भरोसेमंद सोर्स माना जा सकता है।

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पुत्र प्राप्ति के योग कैसे बनते हैं? पुत्र होने वाले तिल

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुत्र प्राप्ति के योग पंचम भाव और उसके स्वामी पर निर्भर करते हैं। पंचम भाव को संतान भाव कहा जाता है और इसका स्वामी ग्रह गुरु होता है। शास्त्रों के अनुसार, गुरु को पुत्र का कारक ग्रह माना जाता है।

इसके साथ ही पंचम भाव में शुभ ग्रहों की उपस्थिति, पंचमेश की शुभ स्थिति और पंचम भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टि पुत्र प्राप्ति के योग का संकेत देती है। इन योगों को आप अपनी कुंडली के माध्यम से किसी ज्ञाता के परामर्श पर जान सकते हैं और दोष होने पर कुंडली शोधन की सहायता ले सकते हैं।

आपके मन में यह सवाल जरूर आ रहा होगा कि गुरु को पुत्र का कारक ग्रह क्यों माना जाता है, इसका कारण यह है कि गुरु को शुक्र का मित्र ग्रह होता है। शुक्र को पत्नी का कारक ग्रह माना जाता है और गुरु के प्रभाव से शुक्र के गुणों का भी विकास होता है, और शुक्र के गुणों में से एक है पुत्र।

क्या वाकई मे शरीर में तिल की उपस्थिति पुत्र प्राप्ति का संकेत देती है ?

समुद्र शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र जैसे प्राचीन भारतीय शास्त्रों में, शरीर में तिल के स्थान और आकार को व्यक्ति के भाग्य और भविष्य का संकेत माना जाता है। इन शास्त्रों के अनुसार, शरीर के कुछ हिस्सों पर तिल पुत्र प्राप्ति का संकेत देते हैं जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया है।

लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, शरीर में तिल की उपस्थिति और पुत्र प्राप्ति के बीच कोई संबंध नहीं है। तिल त्वचा के रंगद्रव्य के असमान वितरण के कारण होते हैं, और वे जन्म से पहले या बाद में किसी भी समय विकसित हो सकते हैं।

हालंकि ज्योतिषशास्त्र की बताई गई बातें अधिकतर हमारे जीवन में सही बैठती हैं चाहे किसी भी पहलू से हो। आप इसे संयोग कहें या ज्योतिषी विद्दा की महत्ता, आपने स्वयं भी इसे महसूस किया होगा।

लेकिन किसी के शरीर पर तिल का क्या अर्थ है, क्या यह प्राप्ति का संकेत है , यह निर्धारित करने के लिए अन्य कारकों पर भी विचार किया जाना चाहिए, जैसे कि व्यक्ति की कुंडली और राशि।

निष्कर्ष

दोस्तों, हमारे शरीर पर तिल की उपस्थिति, तिल  जगह और रंग का विशेष महत्व होता है और शास्त्रों में इसका बखूबी वर्णन किया गया है। आज के आर्टिकल में हमने जाना पुत्र होने वाले तिल (Putra hone wale til) कहाँ पर पाए जाते हैं और इसका हमारे भाग्य पर क्या प्रभाव पड़ता है। उम्मीद है, आपको यह जानकारी पसंद आई होगी, ऐसी ही काम की जानकारी के लिए हमारे ब्लॉग को बुकमार्क कर लें।

हमारी वेबसाइट लड़का लड़की में किसी तरह के भेदभाव या Gender Inequality का किसी भी प्रकार से समर्थन नहीं करती है। न ही हम जन्म से पहले लिंग की जाँच का समर्थन करते हैं और न ही इस आर्टिकल का यह मकसद है। यह आर्टिकल सिर्फ जानकारी हेतु लिखा गया है।

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