Piles treatment in hindi बवासीर का इलाज तथा उपचार

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बवासीेर एक गंभीर बिमारी है जो काफी दर्दनाक हो सकती है । इस रोग में व्यक्ति के गुदा के अंदर एंव बहार का हिस्सा सूजने लगता है और मलाशय पर भी सूजन आने लगती है । बवासीर में मस्से भी निकलते हैं जो खुद ब खुद अंदर बहार आते-जाते रहते हैं ।

कुछ लोगों में बवासीर ज्यादा गंभीर नही होती है उनको बवासीर होता है और अपने आप चला जाता है जबकि कुछ लोगों में ये लम्बें समय तक बना रह सकता है और स्वस्थ को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है इसलिए इस रोग से जितनी जल्दी छुटकारा मिल जाए उतना ही अच्छा है इसलिए आज हम आपको बताएगे bawaseer ka ilaj और Piles treatment in hindi

देखिये अगर बवासीर को शुरूआत में काबू कर लिया जाए तो ज्यादा बेहतर रहता है लेकिन अगर आपका बवासीर गंभीर अवस्था में पहुच गया है तब भी कोई चिंता ना करें क्योकि कई ऐसे Treatment उपलब्ध है जिनके द्वारा आप बवसीर से छुटकारा पा सकते हैं ।

आज इस आर्टिकल में हम आपको बवासीर के देसी उपाय के साथ बवासीर की दवा ( Bawaseer ki dawa ) के बारे में भी बताएगे । इस लेख में आपको बवासीर से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारीयां भी बताई जाएगी ।

लेकिन बवासीर के नामों से कन्फूज ना हों, क्योकि बवसीर को कई नामों से जाना जाता है । इसे English में piles और Hemorrhoids के नामों से जाना जाता है ।

बवासीर क्या है ( What is piles in hindi )

 

Bawaseer ka ilaj
Bawaseer ka ilaj

 

बवासीर एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को मल के साथ खून आ सकता है, मगर ये बवासीर के प्रकार पर निर्भर करता है क्योकि वादी बवासीर में मल से साथ खून नही आता केवल असहाय पीडा व दर्द होता है ।

बवासीर के प्रकार ( Types of piles or hemorrhoids in hindi )

बवासीर कई प्रकार का हो सकता है और हर प्रकार के बवासीर के अलग-अलग लक्षण होते हैं इसलिए वबासीर के इलाज से पहले उसके बारे में सही जानकारी भी होनी चाहिए चलिए बवासीर के कुछ प्रकारों के बारे में जानें

आंतरिक बवासीर

आतंरिक बवासीर को देख पाना बहुत मुश्किल होता है क्योकि ये गुदा में बहुत गहराई तक होता है । यह बवासीर ज्यादा गंभीर नही होता और आमतौर पर ये अपने आप ही चला जाता है । कभी-कभी आंतरिक बवासीर आपके गुदा से बाहर तक आ सकती है फिर रक्तस्त्राव हो सकता है । इसे खूनी बवासीर के नाम से भी जाना जाता है । कुछ लोगों को लगता है की खूनी बवासीर का इलाज ( Khooni bawaseer ka ilaj ) सम्भंव नही है लेकिन ऐसा कुछ नही है ।

खूनी बवासीर के घरेलू व देसी उपाय मौजूद हैं और ऐलोपैथी में भी उपचार है ।

देखिये मलाशय में दर्द को पता लगाने वाली कोई नर्व नही होती इसलिए ज्यादातर लोगों को खूनी बवासीर में दर्द महसूस नही होता लेकिन अगर फिर भी आपको मल के साथ खून आ रहा है तो आपको तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर को दिखाना चाहिए । इसके अलावा समस्या ज्यादा बढ़ने पर कई लक्षण दिख सकते हैं जैसे:- दर्द या असहज महसूस होना, मलाशय ( anus ) के आस-पास गांठ या सूजन सा लगना, खुजली आना और जलन सी महसूस होना

प्रोलैप्सड

प्रोलैप्लड तब आता है जब आंतरिक होमोरोइड सूजने लगता है और गुदा के बहार आने लगता है एक डॉक्टर नें ग्रोडों कै द्वारा बताया है की किस तरह होमोरोइड बहार आता है ।

पहला ग्रेड:~ इस ग्रेड या स्थिति में प्रोलैप्सड नही होता

दूसरा ग्रेड:~ दूसरे ग्रेड में प्रोलैप्सड आना शुरू हो जाता है लेकिन खुद ब खुद पीछे की ओर हट जाता है। ये प्रोलैप्सड तभी होता है जब कोई व्यक्ति अपनी गुदा या रेक्टल एरिया पर मल त्यागते समय ज्यादा दबाल डालता है ।

तीसरा ग्रेड:~ इस स्थिति में भी प्रोलैप्सड आने लगता है लेकिन वो अपने आप अंदर नही जाता, इस हालत में जल्दी इलाज करने की जरूरत होती है ताकि ये दर्दनाक या इंफेक्शन से ग्रस्त ना हो जाए

चौथा ग्रेड:~ यह प्रोलैप्सड की आखरी स्टेज है इसमें

प्रोलैप्सड को बिना दर्द के पीछे नही हटाया जा सकता । इस स्थिति को दूर करने के लिए इलाज करवाना होता है ।

लेकिम प्रोलैप्सड को पहचाने कैसे? इसे पहचानना बहुत आसान है प्रोलैप्सड होमोरोइड सूजी हुई गांठ की तरह गुदा पर दिखेगे, आप किसी शीशे की मदद से इसको आसानी से देख सकते हैं । प्रोलैप्सड होमोरोइड का केवल एक ही लक्षण है की इसमें फलाव होगा या उसमें दर्द, जलन या खुजली हो सकती है ।

कुछ गंभीर हलातों में प्रोलैप्सड होमोरोइड को सर्जरी के द्वारा हटाना पड़ता है ताकि वो और ज्यादा दर्द की वजह ना बने ।

बहारी होमोराइड ( External hemorrhoids )

बहारी होमोरोइड ( External hemorrhoids ) गुदा पर उस जगह होता है जहाँ मल त्याग होता है । इसको आसानी से देखा जा सकता है मगर कभी-कभी ये गुदा की सतह पर गांठ की तरह होते हैं । बहारी होमोरोइड वैसे तो कोई गंभीर समस्या नही है लेकिन ये काफी दर्द की वजह बन सकता है और प्रतिदिन के सामान्य जीवन में दखल डाल सकता है।

इसलिए यदि आपको किसी प्रकार की समस्या हो तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं ।

बहारी होमोरोइड के लक्षण आतंरिक होमोरोइड की तरह ही होते हैं । क्योकि ये गुदा के ऊपरी सतह पर होतई हैं इसलिए इस समस्या से पीडित लोगों को बैठने, कोई काम करते समय या मल त्यागते समय असहजता या दर्द होता है । बहारी होमोरोइड में किसी प्रकार का दर्द होने पर अपने डॉक्टर को जल्द से जल्द सूचना दें ।

थ्रॉम्बोस्ड होमोराइड

थ्रॉम्बोस्ड होमोरोइड में होमोरोइड ऊतकों पर एक खून का पिंड होता है जोकि गुदा पर गांठ या सुजन की तरह दिखता है । थ्रॉम्बोस्ड होमोरोइड होमोरोइड की एक जटिल अवस्था है जिसमें रक्त पिंड बनते हैं ।

खून के पिंडो का निर्माण बहारी और आतंरिक दोनों होमोरोइड में हो सकता है और इसमें कई तरह के लक्षण महसूस हो सकते हैं जैसे- तेज खुजली या दर्द होना, सूजन एंव लालपन होना और होमोरोइड के आस-पास नीला सा रंग होना ।

ज्यादा दर्द, खुजली या जलन होने पर तुरंत अपने डॉक्टर को सूचना दें क्योकि थ्रॉम्बोस्ड होमोरोइड का जल्दी इलाज करना जरूरी होता है ।

बवासीर के कारण ( Cause of piles in hindi )

ऐसा कोई भी काम या हरकत जिससे मलाशय या गुदा की नसों पर कोई तनाव पडता हो वो बवासीर का करण बन सकता है । इसके अलावा भी बवासीर के कई कारण होते हैं जिनमे कुछ रिस्क फैक्टर ( Risk factor ) भी शामिल हैं जैसे:-

•ज्यादा वजन या मोटापे का होना

•मल त्यागते समय जरूरत से ज्यादा जोर लगाना

•डायरिया या कब्ज की शिकायत होना

•नियमित मल त्याग ना होना

•लम्बे समय तक एक ही जगह बैठे रहना

•गर्भवती होना या बच्चे को जन्म देने के कारण भी बवासीर हो सकता है

•सही मात्रा में फाइबर नही लेना

•ज्यादा laxatives का इस्तेमाल करना

•उम्र का अधिक होना

बवासीर से बचाब के उपाय ( Prevention of piles in hindi )

जितना बवासीर का इलाज और बवासीर की दवा कराना जरूरी है उतना ही इसकी रोकथाम व बचाव भी जरूरी है इसलिए हम यहाँ आपको बवासीर के बचाब ( prevention of piles ) के बारे में बता रहे हैं ।

अधिक फाइबर लिजिए

बवासीर अक्सर उन लोगो को होता है जिनको मल त्यागने की समस्या रहती है इसलिए आपको अधिक फाइबर लेना चाहिए क्योकि इससे मल त्यागने की समस्या दूर होगी जिससे बवासीर में राहत मिलेगी । आप फाइबर की कमी अच्छी डाइट या सप्लीमेंट ( supplements ) से पूरी कर सकते हैं । फाइबर की अच्छी मात्रा लेने की सलाह सभी प्रकार के डॉक्टर और गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट भी देते हैं ।

डॉ कुसीन ( Dr. Kussin ) कहते हैं की “ज्यादा फाइबर लेने से थोडी गैस की समस्या बढ़ सकती है लेकिन ये फाइबर से मिलने वाले फायदों की तुलना में बहुत छोटी किमत है” । आपको दिन में 25 से 30 ग्राम फाइबर लेना चाहिए । केला, सेब, ब्रोकली, ओट मील, ब्राउन राइस, व्होल ग्रेन और फलियां फाइबर के अच्छे स्त्रोत माने जाते हैं ।

अधिक मात्रा में पानी पिजिए

पार्याप्त मात्रा मे पानी पीने से मल त्यागने में आसानी होती है और इससे कब्ज की समस्या भी दूर होती है लेकिन फिर भी अफसोस की बात है की लोग शरीर की अवाश्यकता से भी कम मात्रा में पानी पी रहे हैं ।

बाल्टीमोर में मर्सी मेडिकल सेंटर के एक गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट एमडी डॉ० रिचर्ड डेसी कहते हैं की “दिन में 6 से 8 ग्लास पानी पीने से ना केवल पाचन तंत्र ढ़ीक रहता है बल्कि इससे पुरे शरीर को फायदा होता है” इस आधार हम आपको सलाह देगे की आप शरीक की अवाश्यकता के अनुसार पानी जरूर पियें

 

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व्यायाम करें

डॉ० डेसी के मुताबिक बवासीर और व्यायाम में प्यार-नफरत जैसा रिश्ता होता है । क्योकि इससे कॉलन ( colon ) ढ़ीक रहता है लेकिन वो कहते है की ऐसा व्यायाम ना करें जिससे उदर पर तनाव दवाब पडे जैसे की वेटलिफ्टिंग, क्योकि इनसे बवासीर की समस्या और बढ़ सकती है इसलिए बवासीर में हैवी वेट वर्काउट करने से बचें इसके बजाए आप योगा और तैराकी कर सकते हैं ।

इच्छा का दमन ना करें

देखिये यदि आप अपने शरीर की प्राकृति के खिलाफ चलेगे तो वो भी आपनी प्राकृति के खिलाफ चलना शुरू कर देगा । कुछ लोग मल त्यागने की इच्छा का दमन करते हैं कुछ लोग ऐसा मजबूरी में करते हैं तो कुछ लोग जान-बूझ कर करते हैं लेकिन किसी भी स्थिति में मल त्याग की इच्छा का दमन करने से कब्ज समेत कई समस्याएं हो सकती हैं । डॉ कुसीन भी कहते है “जब आपका शरीर कोई आदेश दे तो उसे पुरा करें”

ज्यादा तनाव ना डालें

मल त्याग के समय ज्यादा तनाव और जोर लगाना अधिक खून और दर्द का करण बन सकता है इसके अलावा ज्यादा वजन उठाने, गंभीर रूप से खासी होने या गर्भावस्था ( pregnancy ) के दौरान भी बवासीर बिगड सकता है इसलिए डॉ० कुसीन कहते हैं “आपकों मल त्यागते समय जागरूक होना चाहिए कही ऐसा तो नही की आप जरूरत से ज्यादा जोर लगा रहे हैं”

बवासीर का इलाज ( Piles treatment in hindi )

कुछ लोग मानते हैं की ज्यादातर मामलों में बवासीर खुद ब खुद ढ़ीक हो जाता है इसमें किसी खास ईलाज की जरूरत नही पडती, इसलिए ये सवाल उठना आम बाॊ है की “हमें इसपर इतना ध्यान देने की क्या जरूरत है”? देखिये इसका सीधा सा जबाव है यदि आप बवासीर का उपचार कराते हैं तो इससे आपको कम दर्द का सामना करना होगा और रोग भी जल्दी ढ़ीक होगा ।

1. लाइफस्टाइल में बदलाव करिये

बवासीर का इलाज करने के लिए आपको किसी हॉस्पिटल जा कर भर्ती होने की जरूरत नही है और ना ही सीधे ऑपरेशन करवाने की जरूरत है ( जबतक की हालत गंभीर ना हो ) आप इसकी शुरूआत अपने प्रतिदिन के जीवन में छोटी-छोटी आदतों बदलाव लाकर कर सकते हैं जैसे:-

अपनी डाइट में बदलाव करें:~ कुछ लोगों का आहार ढ़ीक नही होता जिसके कारण उनका मल कठोर हो जाता है जिसकी वजह से उन्हे अधिक जोर लगाना पडता है । अधिक जोर लगाने से बवासीर की समस्या ज्यादा बढ़ जाती है । इसलिए डाइट में थोड़ा सकारात्मक बदलाव लाने से मल सॉफ्ट हो जाता है जिसके कारण मल त्याग आसानी से हो जाता है ।

जैसा की हमने पहले कहा आपको अपनी डाइट में फाइबर से युक्त आहार का अधिक सेवन करना चाहिए इसके लिए आप हरी सब्जियों एंव अलग-अलग रंगों के फलों का उपयोग कर सकते हैं।

इसके अलावा अधिक पानी पिजिए और उन खाद पदार्थें का सेवन कम करिये जिनमें अधिक मात्रा में कैफीन पाया जाता है ।

वजन कम करें:~ ज्याद मोटापा कई भयानक बिमारीयों का कारण होता है लेकिन बवासीर में मोटापा और अधिक घातक हो सकता है इसलिए मोटापे को घटा कर बवासीर की गंभीरता को कम किया जा सकता है ।

शौचालय में ज्यादा देर तक ना रहें:~ बवासीर के दौरान आपको टॉलेट में कम समय बिताना चाहिए क्योकि आप जितना समय बैठेगे उतना ही तनाव आपके निचले हिस्से पर पडेगा इसके साथ ही आपको सही तरीके से बैठ कर शौच करना चहिए क्योकि गलत तरीके से बैठने पर गुदा पर नकारात्मक दवाब पडेगा । इसलिए जितनी जल्दी हो सके शौच कर लिया करें ।

एक्टिव रहिये:- जिस तरह बेकार पडी लकड़ी को दिमक खा जाती है, लोहे का इस्तेमाल ना करने से उसमें जंग लग जाती है उसी तरह आलसी व्यक्ति के शरीर को तरह-तरह के रोग घोघला कर देते हैं । इसलिए आपको अपनी बॉडी को एक्टिव रखना चाहिए । अासली पडे रहने से बेहतर है की आप थोड़ा व्यायाम ही कर लिया करें।

2. कुछ जरूरी दवाईयों का उपयोग करें

बवासीर में कई प्रकार की दवायें आपको सहायता पहुचा सकती हैं जिनमें दर्द निकवारक दवाईयां ( painkillers ), क्रीमें, मलहम, और पैड शामिल है जो सूजन एंव दर्द कम करने में मदद कर सकती है ।

इसके अलावा ओटीसी remedies भी बवासीर के दर्द को कम करने में मदद कर सकती हैं । आप अपने डॉक्टर से कह कई अन्य दवाओं का भी सेवन कर सकते हैं जो आपको बवासीर से निपटने में मदद करेगी लेकिन ध्यान रहे हैं की उन दवाओं का उपयोग डॉक्टर के निर्देशों के अनुसार ही करना है ।

कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स का उपयोग करिये:~ बवासीर से पीडित लोग अक्सर दर्द और जलन से परेशान रहते हैं इस स्थि़ति में कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स ( Corticosteroids ) मददगार हो सकती हैं क्योकि इनसे दर्द व जलन कम होती है ।

जुलाब है लाभदायक:~ अगर बवासीर में कब्ज हो जाए तो फिर परेशानियों का कहना ही क्या? इस हालत में व्यक्ति मल त्यागने के लिए सामान्य स्थिति से ज्यादा जोर लगाता है जिसके कारण समस्या अधिक बड़ जाती है । ऐसी हालत मे डॉक्टर जुलाब लेने की सलाह दे सकता है जिससे कब्ज में राहत पहुचेगी और जोर भी कम लगाना पडेगा ।

इसके अलावा बवासीर को ढ़ीक करने के लिए कई दूसरे उपाय भी किये जाते हैं । जिनके बारे में हम यहाँ नही बता सकते हैं अगर आप उन इलाजोंके बारे में जानना चहाते हैं तो अपने डॉक्टर से जानकारी लें

बवासीर में क्या खाना चाहिए ( What to eat for piles in hindi )

हमारी डाइट हमारे स्वास्थ्य का आधार होती है एक अच्छी और पोषण से भरपूर डाइट लेने से कभी कोई रोग नही होता लेकीन वही असंतुलित और बिना पोषण की डाइट लेने से रोग प्रति रोधक क्षमता कमजोर हो जाती है जिससे कई बिमारीयां लग जाती हैं एंव कई समस्या पैदा हो जाती है । इसलिए हम यहाँ आपको कुछ ऐसे खाद पदार्थों के बारे में बता रहे हैं जिनसे आपको बवासीर में राहत मिलेगी ।

फलियां:~ बवासीर के इलाज के लिए सबसे जरूरी है की आप सही मात्रा में फाइबर लें । जो आहार आप खाते हैं उससे आपको दो प्रकार का फाइबर घुलनशील और अघुलनशील मिलता है । घुलननशील फाइबर पाचन तंत्र की आँतों में जैल सा पदार्थ बानाता है जिसस पाचन तंत्र के अच्छे बैक्टेरिया आसानी से पचा लेते है जबकि अपचनशील मल में बल्क ( Bulk ) एड करता है । अच्छी और स्वस्थ आंते के लिए आपको दोनो प्रकार के फाइबरों की जरूरत है ।

फलियां बीज वाली सब्जियां होती हैं जिनमें दोनो फाइबर पाए जाते हैं लेकिन इनमें घुलनशील फाइबर अच्छी मात्रा पाया जाता है । इन फलियाों में मुख्य तौर पर सेम, मटर, मूंगफली, सोयाबीन, दाल और छोले शामिल हैं। आप शायद ना जानतें हों मगर 198 ग्राम पकी हुई दाल में लगभग 16 ग्राम फाइबर होता है जोकि डॉक्टरों के द्वारा बताए गई प्रतिदिन की फाइबर का आधा है । बाकि आधी फाइबर की जरूरत आप दूसरे स्त्रोतों जैसे- फलों से पुरी कर सकते हैं ।

साबुत अनाज:~ फलियों की तरह ही साबुत अनाज भी पोषण से भरपूप होता है क्योकि इनमें रोगाणु, चोकर और एंडोस्पर्म मौजूद होते हैं, जोकि फाइबर जैसे घटकों से भरे होते हैं । इसके साथ ही साबुत अनाज ( Whole grains ) में अच्छी मात्रा में अघुलनशील फाइबर भी पाया जाता है जो पाचन तंत्र को ढ़ीक रखने में मदद करता है और इससे बवासीर के दौरान होने वाली असहजता एंव दर्द भी कम होता है ।

ब्रोकली और इससे सम्बन्ध रखने वाली दूसरी सब्जियां:~ ब्रोकली और इससे सम्बन्ध रखने वाली सब्जियों में मुख्य तौर पर ब्रसेल्स स्प्राउट्स ( Brussels sprouts ), बॉक चॉय ( bok choy ) ब्रोकोली ( Broccoli ) , फूलगोभी, आर्गुला, , केल, मूली, शलजम और गोभी आते हैं । आमतौर पर इन सब्जियों को कैंसररोधी गुणों ( anticancer properties ) के लिए जाना है मगर इसके साथ ही इनमें अधुलनशील फाइबर की अच्छी भी पाई जाती है और हम आपको पहले ही बता चुके हैं की अघुलनशील फाइबर बवासीर में कितना फायदेमंद है ।

आटिचोक:~ आटिचोक ( Artichokes ) फाइबर का एक बहुत अच्छा स्त्रोत होता है । एक सामान्य आकार के कच्चे आटिचोकर में 7 ग्राम तक फाइबर पैक होता है । दूसरे फाइबर से भरपूर खाद पदार्थों की ही तरह आटिचोक भी पाचन तंत्र की आँतों में अच्छे बैक्टेरिया की मात्रा को बढ़ाता है । इंसानों पर हुई दो स्टाडीयों के मुताबिक आटिचोक में इनुलिन ( inulin ) नाम का घुलनशील फाइबर होता है जो आंतों में अच्छे बैक्टेरिया की संख्या बढ़ाकर पाचन को स्वास्थ रखने में मदद करता है ।

जड़ो वाली सब्जियां:~ जड़ वाली सब्जियों जैसे आलू, गाजर, रूतबागा, शकरकंद, शलजम, और बीट पोषण से भरपूर होती हैं । इसके अलावा इनमें आंतों को स्वस्थ रखने वाला फाइबर भी पाया जाता है ।

बेल पेपर्स:~ बेल पेपर्स ( Bell peppers ) बवासीर में राहत पहुचाने वाली दूसरी सबसे बढ़िया सब्जी है जिसे आपको खाना ही चाहिए माध्यम आकार की कटी हुई एक कप वेल पेपर्स में 2 ग्राम तक फाइबर पाया जाता है । खैर इनमें अधिक मात्रा में फाइबर मौजूद नही है जितना की दूसरी सब्जियों में होता है लेकिन ये शरीर को अच्छी तरह हाइड्रेट करती हैं क्योकि इनमें लगभग 93 प्रतिशत तक पानी होता है । इसके अलावा ये मल को नरम करती है जिसके कारण उसका आसानी से निष्कासन हो जाता है ।

खीरे और खरबूजे हैं लाभकारी:~ वेल पेपर्स की तरह खीरे और खरबूजे भी शरीर को फाइबर व अच्छी मात्रा में पानी देतें हैं । जोकि पाचन और आंतो को स्वास्थ रखने में मदद करते हैं इसके अलावा इनसे त्वचा पर भी निखार आता है ।

नाशपाती है बवासीर में लाभदाय:~ नाशपाती भी बवासीर में काफी फायदेमंद है क्योकि एक सामान्य आकार के नाशपाती में 6 ग्राम के करीब फाइबर होता है जोकि फाइबर के प्रतिदिन की 22 प्रतिशत जरूरत को पूरा करता है । आप नाशपाती को कच्चा ही खा सकते हैं क्योकि ये स्वाद में भी अच्छा होता है लेकिन ध्यान रहे की इसे खाने से पहले इसका छिलका जरूर ऊतार लें ।

सेब का सेवन है बवासीर में लाभकारी:~ नाशपाती की ही तरह सेब में भी फाइबर की अच्छी-खासी मात्रा होती है लगभग एक सामान्य आकार के सेब में 5 ग्राम तक फाइब होता है जोकि कुछ-कुछ नाशपाती से मिलने वाले फाइबर जितना ही है । इसके अलावा सेब में पेक्टीन ( pectin ) नाम का घुलनशील फाइबर होता है जोकि पाचन तंत्र की आंतो में जैल जैसे पदार्थ का निर्माण करता है जिसकी वजह से मल नरम हो जाता है और बिना जोर लगाए ही आसानी से उसका निष्कासन हो जाता है ।

रास्पबेरी का सेवन है फायदेमंद:~ रास्पबेरी एक रेशेदार स्वादिष्ट फल होता है जिसमें काफी मात्रा में फाइबर और दूसरे पोषक तत्व मौजूद होते हैं । एक कप रास्पबेरी में 8 ग्राम फाइबर होता है और बाकि का 85 प्रतिशत पानी होता है । इसलिए इस फल के नियमित सेवन करने से बिना तकलीफ और ज्यादा जोर के शौच होने लगता है ।

केला खाईये:~ केला बवासीर के लक्षण कम करने में बहुत कारगर है क्योकि इसमें अच्छी मात्रा में पेक्टीन ( pectin ) और प्रतिरोध स्टार्च होता है । एक सामान्य आकार के 7 से 8 इंच के केले में 3 ग्राम फाइबर होता है । केले में पाया जाने वाला पेक्टिन आंतों में जैल का निर्माण करता है और प्रतिरोध स्टार्च अच्छे बैक्टेरिया को बढ़ाता है इन दोनो ये मिश्रण ही केले को बवासीर में लाभदायक बनाता है ।

इसके अलावा आप स्टुअड प्रउन्स, अजवाइन, स्क्वैश का भी सेवन कर सकते हैं उनके उपयोग से भी बवासीर में आराम पहुचता है ।

बवासीर में परहेज ( Food to avoid in piles in hindi )

ऐसे कई खाद पदार्थ हैं जिनसे आपको पुरी तरह बचना चाहिए खास कर उन खाद पदार्थों से जिनमें बहुत कम फाइबर होता है क्योकि इनसे कब्ज की समस्या बढ़ सकती है जोकि बवासीर को और मुश्किल बना देगा इन खाद पदार्थें में मुख्य तौर से आते हैं-

डेरी प्रोडक्ट:- डेरी प्राडतक्टो ( Dairy products ) में मुख्स रूप से पनीर, दूध और इससे मिलते-जिलते खाद पदार्थ आतें हैं बवासीर में इनसे बचने का प्रयास करना चाहिए

सफेद आटा:~ सफेद आटे से चोकर और अच्छे रोगाणु हटा दिये जाते हैं जिसके कारण उसके खाने का ज्यादा फायदा नही होता इसलिए आपको इनसे बचना चाहिए और सफेद आटे के बने ब्रेड एंव पास्ता से भी बचना चाहिए

मांस:~ बवासीर के दौरान मांस को बिल्कुल छोड़ दिजिए खास कर की लाल मांस को क्योकि ये पाचन में अधिक समय लेता है तथा कब्ज का करण बन सकता है ।

अधिक तले हुए:~ अधिक तले हुए पदार्थ और ज्यादा वसायुक्त पदार्थों से भी बचना चाहिए क्योकि ये पाचन में ज्यादा समय लगाते हैं ।

अधिक नमकीन आहार:~ ज्यादा नमकीन आहार लेने से bloating हो सकती है जिससे बवासीर और अधिक संवेदनशील हो जाएगा ।

ज्यादा मसालेदार वाला भोजन:~ इससे कोई फर्क नही पडता की अधिक मसालेदार वाला भोजन फाइबर युक्त है या बिना फाइबर वाला है इससे बवासीर में समस्या जरूर पैदा होगी क्योकि इनसे दर्द और असहजता बढ़ेगी ।

कैफीन से युक्त पीने वाले पदार्थ:~ कैफीन से युक्त पिय जाने वाले पदार्थ जैसे- कॉफी से आपको बचना चाहिए क्योकि इनसे मल कठोर हो जाएगा जिसकी वजह से उसका निष्कासन अधिक मुश्किल और दर्दनाक हो जाएगा ।

शराब या एल्कोहॉल:~ कैफीन वाले पिय पदार्थों की तरह शराब या एल्कोहॉल भी मल की नमी खत्म कर देते हैं जिससे उसका Pass होना मुश्किल हो जाता है जोकि बवासीर से परेशान व्यक्ति के लिए कोई अच्छी बात नही है ।

बवासीर के लिए आयुर्वेदिक दवा ( Bawaseer ki dawa )

यहाँ हम आपके बवासीर के लिए कुछ आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में बता रहे हैं जिनका इस्तेमाल बवासीर के इलाज में किया जाता है ।

त्रिफला का पाऊडर:~ आयर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ० बी०एन० सिन्हा के मुताबिक बवासीर का सबसे मुख्य वजह कब्ज होता है । इसलिए वह त्रिफला पाऊडर का उपयोग करने की सलाह देते हैं क्योकि त्रिफला के नियमित उपयोग करने से पेट पूरी तरह साफ होता है । डॉ० बी०एन० सिन्हा सलाह देते हैं की त्रिफला के पाऊडर का सेवन रात को सोने से पहले गर्म पानी के साथ करना चाहिए ।

कैस्टर ऑइल:~ कैस्टर ऑइल बवासीर में इस्तेमाल किये जाने वाले सबसे बढ़िया तेलों में से एक है क्योकि इसमें एंटी-ऑक्सीडेंट, सुजनरोधी, एंटी-बैक्टेरियल और एंटी-फंगल गुण मौजूद होते हैं ।इन्ही गुणों की वजह से कैस्टर ऑइल बवासीर में लाभदायक माना जाता है । बी०एन सिन्हा के मुताबिक आपको 3 Ml कैस्टर ऑइल को दूध के साथ रेगुलर लेना चाहिए साथ ही आप कैस्टर ऑइल को प्रभावित जगह पर लगा भी सकते हैं । यदि कैस्टर ऑइल का दूध के साथ सेवन किया जाए और इसके साथ ही प्रभावित जगह पर लगाया भी जाए तो इससे बवासीर के लक्षण कम होते हैं ।

हींग:~ डॉ० सिन्हा कहते हैं की यदि आप बवासीर से परेशान हैं तो आपको हींग का सेवन जरुर करना चाहिए और उसको डेली उपयोग में लेना चाहिए । हींग को आप एक ग्लास पानी में डाल कर ले सकते हैं या सब्जी एंव सलाद के साथ ले सकते हैं । हींग पाचन तंत्र को मजबूत करती है और बवासीर में भी लाभकारी सिध्द होती है ।

इसके अलावा भी कई आयुर्वेदिक औषधियां है जिनका इस्तेमाल बवासीर में किया जा सकता है लेकिन वैज्ञानिक रीसर्च ना होने के कारण हम आपको उन्हे लेने की सलाह नही दे सकते ।

तो दोस्तों ! हमें उम्मीद है की आपको हमारा ये आर्टिकल बवासीर का इलाज ( bawaseer ka ilaj / piles treatment in hindi ) जरूर पसंद आया होगा कृपया इस लेख को उन लोगो तक जरूर शेयर करें जिन्हे इसकी जरूरत है ।


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